हिन्दी दिवस पर विशेष
"हिन्दी केवल एक भाषा नही, यह हमारे मन की आवज़, हमारी संस्कृति की आत्मा और हमारी पहचान का प्रतीक है।"
हिन्दी सिर्फ हमारी भाषा नही, बल्की हमारी पहचान है अपितु यह सिर्फ बोलने या लिखने की भाषा नही है, बल्कि यह हमारे वैक्तिक जीवन, हमारी भावनाओ ंका दर्पन और हमारी संस्कृति की
आत्मा भी है। इंसान अपने विचारों और भावो को जब शब्दो में पिरोता है तो वही साहित्य कहलाता है और साहित्य के हर रंग, हर रस और हर सुख का असली आनंद हेिन्दी भाषा में मिल सकता है।आखिर क्यो खास है हिन्दी ?
वैसे तो दुनिया में हज़ारो भाषाऍं हैंं, लेकिन हिन्दी इतनी सरल, सहज और मधुर है कि इसे सुनते ही दिल को अपनापन सा महसुुस होता है। दुनिया की बहुत-सी भाषाओं में वह गहराई नही है, जो हमारी हिन्दी भाषा में झलकता हैं। हिन्दी के शब्द सीधे दिल को छु जाते हैं। इसमे प्रेम, करुणा, हास्य, व्यंग्य, वीरता, सब का मेल है, यानी मानव जीवन की हर भावना को व्यक्त करने की क्षमता हमारी हिन्दी भाषा में है। यह एक मात्र भाषा नही, बल्कि जीवन जीने का तरीका भी सिखाती है और ये हमारे स्वाभिमान और हमारी एकता का प्रतीक भी है।
साहित्य और हिन्दी साहित्य में जो रस, छंद, अलंकार और भावो का जो संगम होता हैै, वह हिन्दी को और भी खास बनाता है। जब हम कभी कबीर का दोहा पढ़ते है - तो जीवन की सच्चाई समझ आती है। तुलसीदास के पद् हमें रामभक्ती में भिगो देते हैं। सूरदास की रचनाऍं, हमें कृष्ण के प्रेम डुबो देती हैं। रहीम के दोहे, हमें नीति और व्यवहार का पाठ पढ़ाते हैैं और साहित्य का उद्देश्य भी यही है - इंसान को इंसान से जोड़ना और जीवन को सार्थक बनाना।
इतिहास के पन्नो सें।
सन् 14 सितम्बर 1949 को भारत के सविंधान सभा में हिंदी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिया गया था। तभी से हर साल 14 सितम्बर को हमारे देश में हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हिंदी मात्र एक भाषा नही अपितु हमारी पहचान है। यही हमें एक-दूसरे से जोड़ती है और पूरे देश को एक सुत्र में बांधे रखती है। इसलिए आज जरुरत एस बात की है कि हम हिंदी को केवल पढ़ाई की किताबो तक ही सीमित ना रखे बल्कि इसे हम अपने वैक्तिक जीवन का आधार भी बनाऐ और नई पीढ़ी को हिंदी बोलने, पढ़ने तथा लिखने के लिए प्रेरित भी करें।
आखिर में।
हिंदी वो भाषा है जो हमें जीवन में हर सुख का स्वाद कराती है। चाहे खुशी हो या दुख, हंसी हो या आंसुू - हिंदी हर भावना को अपने शब्दो में सहजता से व्यक्तत कर देती है। इसलिए हमें हिंदी का सम्मान करना चाहिए और इसके प्रचार-प्रसार में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
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